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'यूएस-चीन व्यापार युद्ध' इस तरह वैश्विक व्यापार पर डाल रहा है प्रभाव

Nibedita Mohanta
Nibedita Mohanta Dec 27 2018 - 2 min read
'यूएस-चीन व्यापार युद्ध' इस तरह वैश्विक व्यापार पर डाल रहा है प्रभाव
जब दो विश्व शक्ति एक दूसरे के साथ टकराव करती हैं तो इससे वैश्विक बाजार के प्रभावित होने की संभावना होती है और इसकी लहरें लंबे समय तक वैश्विक खिलाड़ियों द्वारा महसूस की जाती हैं।

यूएस-चीन व्यापार युद्ध काफी चर्चित मुद्दा है। विश्लेषकों और अर्थशास्त्री इसके प्रभाव को समझने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और यह भी किए विश्व व्यापार वातावरण में क्या प्रभाव डालने जा रहा है।

जब दो विश्व शक्ति एक दूसरे के साथ टकराव करती हैं तो इससे वैश्विक बाजार के प्रभावित होने की संभावना होती है और इसकी लहरें लंबे समय तक वैश्विक खिलाड़ियों द्वारा महसूस की जाती हैं।

व्यापार युद्ध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अनुचित व्यापार प्रथाओं और बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाते हुए चीन को झुका दिया है। कनाडा और मेक्सिको को छोड़कर सभी देशों से एल्यूमीनियम और स्टील पर 10-25% ड्यूटी लगाई गई है। अमेरिका ने चीन के निर्यात उत्पादों पर 200 बिलियन डॉलर टैरिफ लगाए हैं।

विश्व अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव:

मांग और आपूर्ति

चूंकि अमेरिका और चीन के बीच संबंध बिगड़े हुए हैं इसलिए संभावना है कि ये आर्थिक दिग्गज वैकल्पिक बाजारों की तलाश करेंगे ताकि वे अपने संबंधित देशों में उपभोक्ताओं की मांगों को पूरा कर सकें। यह बाकी के देशों के लिए अवसर खोल देगा जो बड़े देश या बड़ी शक्तियों वाले देशों के साथ जुड़ना चाहते हैं।

इसलिए मांगों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक बाजार ढूंढना दक्षिण अफ्रीका, भारत, मध्य पूर्व जैसे देशों के लिए अधिक व्यावसायिक अवसर पैदा करेगा।

व्यवसाय के अवसर

भारत अधिक उत्पादों और निर्माताओं को आकर्षित करने की संभावना रखता है क्योंकि यह चीन के बाद एक बड़े बाजार का प्रतिनिधित्व करता है। इससे उचित उत्पादों की मांग बढ़ जाएगी, जो भारत में निर्माता, आपूर्तिकर्ताओं और व्यवसायों के लिए व्यावसायिक अवसर पैदा करेगी।

चूंकि ट्रम्प ने एल्यूमीनियम और स्टील पर टैक्स लगाया है इसलिए भारत को अपने धातु कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक रास्ता खोजना होगा।

विदेशी उत्पादों की कीमत में उछाल

टैरिफ में वृद्धि के कारण, विदेशी उत्पादों की कीमत बढ़ने जा रही हैं। निर्यातकों को वैश्विक व्यापार की कमी का सामना करना पड़ सकता है। रुपए की हर रोज गिरती कीमत भी व्यापार युद्ध की वजह से है जिससे उत्पादन की लागत और बढ़ जाएगी।

आखिर में उपभोक्ता को ही इन सभी आर्थिक उथल- पुथल के लिए कीमत चुकानी पड़ती है हालांकि, मुद्रास्फिती (इंफ्लेशन) में गिरावट का अनुमान रहता है।

विश्लेषकों के मुताबिक, टैरिफ का प्रत्यक्ष प्रभाव, भले ही हर चीज पर 25 प्रतिशत लगाया जाए, लेकिन चीन से अमेरिकी आयात केवल चाइनीज ग्रोथ को 0.5% तक ही कम कर सकेगा।

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